तीन बकरियाँ और भेड़िया
एक समय की बात है, एक पहाड़ी गांव के पास तीन बकरियाँ रहती थीं जो कभी एक-दूसरे से अलग नहीं होती थीं। जब एक चालाक भेड़िया उन्हें अलग करने की कोशिश करता है, तो तीनों बकरियाँ सीखती हैं कि एकता ही असली ताकत है।

एक समय की बात है, एक पहाड़ी गांव के पास तीन बकरियाँ रहती थीं जो कभी एक-दूसरे से अलग नहीं होती थीं। जब एक चालाक भेड़िया उन्हें अलग करने की कोशिश करता है, तो तीनों बकरियाँ सीखती हैं कि एकता ही असली ताकत है।

गांव के किसान राधाकांत की बेटी मुनिया की विदाई का दिन उसके जीवन का सबसे भावनात्मक पल था। विदाई की बेला में बाप-बेटी ने समझा कि सच्चा प्रेम दूरी को मिटा देता है।

जून की शाम को पहली बारिश में एक सुंदर नीले मोर ने अपनी पूंछ खोली। गांव के बच्चों की चीख निकल गई जब वह बारिश के बीच नाचने लगा, मानो वह खुद ही मानसून का दूत हो।

गांव के कुम्हार दादा के हाथों में तीस साल का अनुभव था। उनके बेटे राजू को सब्र से सीखना पड़ा कि मिट्टी को तराशना सिर्फ कला नहीं, बल्कि जीवन सीखना है।

एक नई बहू को गांव की पहली सर्दी में न केवल ठंड से, बल्कि अकेलेपन से भी जूझना पड़ता है। पर जब सास प्रेम से लड्डू बनाती है और कहती है ‘अब मैं भी तेरी मां हूं’, तो ससुराल की सर्दी अपनापन की गर्माहट में बदल जाती है।

रामदास, एक अनपढ़ किसान, लेकिन गांव के सबसे बड़े कवि। उनकी सीधी-सादी कविताएं हर किसी का दिल छू जाती हैं।

जब गांव की पहली मानसून की बारिश हुई, मीरा ने एक नीले-हरे मोर को खेत में अपनी पूंछ फैलाकर बारिश में नाचते देखा। यह दृश्य इतना जादुई था कि सभी बच्चे मंत्रमुग्ध हो गए।

एक पुरानी चिट्ठी ने पचास सालों की खामोशी तोड़ दी और घर में फिर से प्यार लौटा आया।

पचास साल पहले दादा सागर सिंह को ढोल बजाने का सपना टूट गया था। लेकिन उनके पोते विक्रम की बारात ने उनका वह अधूरा सपना पूरा कर दिया, और गांव भर में ढोल की धड़क गूंज उठी।

एक गरीब लड़का चोरी का विचार करता है, पर ईमानदारी का रास्ता चुनकर अपनी ज़िंदगी बदल देता है।

एक छोटी बालिका मीरा अपनी दादी के साथ बसंत के मेले में जाती है। पीली चुनरियों और सरसों के फूलों के बीच, वह अपनी दादी को नया जीवन देखने का आनंद देती है और समझ जाती है कि प्रेम ही सबसे बड़ा त्योहार है।

बीस साल का इंतज़ार, एक बुज़ुर्ग माँ की आँखों में… जब परदेसी बेटा अंततः घर लौटा, तो समझ आया कि सच का सुख घर ही में है।