गांव के दो भाई
राज और प्रताप गांव के दो भाई थे जो ज़मीन के बंटवारे को लेकर दुश्मन बन गए। लेकिन एक भारी बारिश ने उन्हें सिखाया कि भाई का प्यार सबसे कीमती दौलत है।

राज और प्रताप गांव के दो भाई थे जो ज़मीन के बंटवारे को लेकर दुश्मन बन गए। लेकिन एक भारी बारिश ने उन्हें सिखाया कि भाई का प्यार सबसे कीमती दौलत है।

बैसाखी की सुबह गांव भर में खुशियों की बहार थी। सोने की बालियों वाली फसल अपनी पूरी शोभा में झूम रही थी, और नीलकंठ खेत के बीच अपनी सहेलियों के साथ नाचती-गाती थी।

कुम्हार दादा के चाक पर बैठा एक लड़का सीखता है कि जीवन में सफलता के लिए धैर्य, प्रेम और निरंतर प्रयास ज़रूरी है।

दादी की पुरानी कहानी में सूखे के दिनों की एक सीख छिपी थी – अपने पास जो है उसे प्यार से रखो और ज़िंदगी तुम्हें कभी निराश नहीं करेगी।

दस साल के राज ने मेले के लालच में चोरी कर बैठा, पर उसका दिल चैन से न बैठा। दादी की प्यारी सीख और अपनी ईमानदारी ने उसे सबसे बड़ा सबक सिखाया।

बलराम का खेत सूख रहा था, पर उसका संकल्प नहीं। गर्मी, प्यास और भूख के बीच एक किसान और उसका परिवार सीखते हैं कि सच्ची संपदा क्या होती है।

पचास साल पहले छोड़ी गई एक चिट्ठी में छिपा था प्रेम और त्याग का एक ऐसा संदेश, जो गांव के पुराने घर की दीवारों में ज़िंदा था।

शहर से लौटा राज अपने गांव के उसी पुराने कुए के पास खड़ा है, जहां उसका पूरा बचपन बसा है। कुए की ठंडी छाया में बसी यादें, दादी दिलारी के प्रेमभरे हाथ और दोस्ती की बातें उसे फिर से गांव का बेटा बना देती हैं।

जब एक अनजान मेहमान नरपुर गांव आया, तो वह न केवल कहानियां ले आया बल्कि बदलाव की नई बयार भी ले आया। देखें कैसे एक पत्रकार की यात्रा एक पूरे गांव की तक़दीर बदल देती है।

राज ने महीने भर मेहनत करके एक सपना देखा था – मेले में अपना चाकू खरीदना। लेकिन मेले में एक छोटी लड़की को देखकर उसका दिल बदल गया…

एक जंगल में तीन मित्रों को सोने का खजाना मिला। लोमड़ी लालच में धोखेबाजी करने लगी, पर सच्चे खरगोश की ईमानदारी ने सब कुछ सामने कर दिया। जानिए कि कैसे सच्चाई जीत गई।

जब बारिश की पहली बूंद गांव के खेतों पर गिरी, तो छोटे राज को एहसास हुआ कि हर बूंद में किसान की मेहनत और सपने छिपे होते हैं।