परदेसी बेटा
तीन साल की प्रतीक्षा के बाद जब परदेसी बेटा शहर की ठंडी-दुनिया को छोड़कर घर लौटा, तो माता-पिता को अहसास हुआ कि सच्चा धन तो रिश्ते ही हैं।

तीन साल की प्रतीक्षा के बाद जब परदेसी बेटा शहर की ठंडी-दुनिया को छोड़कर घर लौटा, तो माता-पिता को अहसास हुआ कि सच्चा धन तो रिश्ते ही हैं।

बीस साल का इंतज़ार, एक बुज़ुर्ग माँ की आँखों में… जब परदेसी बेटा अंततः घर लौटा, तो समझ आया कि सच का सुख घर ही में है।