ढोल की धड़क और बूढ़े दादा का सपना

🎧 यह कहानी सुनें

गांव के हरे-भरे खेतों के पास एक छोटा-सा घर था, जहाँ अस्सी साल के दादा सागर सिंह रहते थे। उनका एक ही सपना था कि अपने पोते विक्रम की बारात खुद ढोल बजाते हुए निकालें। पचास साल पहले उनके हाथ से ढोल छूट गया था, जब एक दुर्घटना में उनके दोनों हाथों को चोट आई थी।

विक्रम की शादी का दिन आ गया। दोपहर के दो बजे जब दादा को पता चला कि बारात निकलने वाली है, तो उनका दिल डूब गया। वे चुपचाप अपने कमरे में बैठ गए और पुरानी यादें निहारने लगे—जब वे गांव के सबसे मशहूर ढोलक वादक थे।

विक्रम ने अपने दादा को इस हाल में देखा। उसे सब कुछ समझ आ गया। बारात निकालने से पहले विक्रम ने पड़ोस के सभी संगीतकारों को इकट्ठा किया और उन्हें अपनी योजना बताई। सभी तुरंत राजी हो गए।

जब बारात की तैयारी का समय आया, तो विक्रम ने अपने दादा को अपनी सफेद मूंछों वाली हंसी के साथ बुलाया। उसने कहा, ‘दादा जी, आप तो ढोल बजाएँगे ही, पर एक शर्त है—आपको मेरे सामने चलना होगा।’

दादा का चेहरा खुशी से चमक उठा। संगीतकारों ने एक तरकीब निकाली—उन्होंने दादा के दोनों हाथों को ढोल से बाँध दिया, और दो मजबूत युवा उन्हें संभालते हुए चलने लगे। यह देखकर पूरे गांव को हँसी आ गई, पर किसी को परवाह नहीं थी।

जब बारात की शुरुआत हुई, तो दादा सागर सिंह का ढोल बोलने लगा—धिन-धिन-धाक, धिन-धिन-धाक! उनके हाथों की थरथराहट और ढोल की गहरी आवाज़ गांव भर में गूँज उठी। सजी हुई सफेद घोड़ी पर विक्रम बैठा था, और उसके पीछे ढोल बजाते हुए उनके दादा चल रहे थे, दो युवकों का सहारा लेते हुए।

बारात की लाइन में फूलों की सजावट, रंग-बिरंगी झंडियाँ, और हज़ारों दीये जल रहे थे। लेकिन सब कुछ दादा के ढोल की आवाज़ के अधीन था। बुजुर्गों की आँखों में खुशी के आँसू बह रहे थे, और युवा लड़कियाँ गाने लगीं।

आधी रात को, जब दुल्हन का स्वागत हो चुका था, तो विक्रम अपने दादा के पैर छूने गया। दादा ने उसे गले लगाया और कहा, ‘बेटा, तुमने मेरा अधूरा सपना पूरा कर दिया। मुझे समझ आ गया कि असली शक्ति हाथों में नहीं, दिल में होती है।’ दादा की आँखों से ढलती हुई खुशी की बूंदें बह रही थीं।

उस रात गांव भर में सिर्फ एक ही बात का चर्चा रहा—कैसे एक बूढ़े दादा ने अपनी पोती की बारात में ढोल बजाकर हर किसी का दिल जीत लिया, और कैसे सच्चा प्यार सब बाधाओं को पार कर जाता है।


🪔 सीख: सच्चा प्यार और परिवार की चाहना किसी भी बाधा को पार कर सकती है। बुजुर्गों के सपनों को पूरा करना न सिर्फ उनका गौरव बढ़ाता है, बल्कि हमारे रिश्तों को भी मजबूत करता है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *