ढोल की धड़कन और दिल की सदा
गांव में जब ढोल की थाप गूंजी, तो यह सिर्फ एक शादी नहीं थी — यह एक गरीब लड़के के सपनों की जीत थी।

गांव में जब ढोल की थाप गूंजी, तो यह सिर्फ एक शादी नहीं थी — यह एक गरीब लड़के के सपनों की जीत थी।

पचास साल पहले दादा सागर सिंह को ढोल बजाने का सपना टूट गया था। लेकिन उनके पोते विक्रम की बारात ने उनका वह अधूरा सपना पूरा कर दिया, और गांव भर में ढोल की धड़क गूंज उठी।