कुएं की कहानी

गांव के बीचों-बीच एक पुराना कुआं था, जिसके पत्थर सौ साल पुराने थे। उसकी दीवारों पर काई उग आई थी और रस्सी के निशान गहरे पड़ गए थे। लेकिन इसी कुएं के पास हर शाम गांव की सारी खुशियां जमा हो जाती थीं।

छोटा राज इसी गांव में रहता था। सुबह जब पहली धूप पड़ती, तो वह अपनी दादी के साथ कुएं पर पानी भरने जाता। दादी धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरतीं, और राज उन्हें थामे रहता। कुएं के अंदर ठंडी हवा आती थी, जो गर्मियों में स्वर्ग जैसी लगती थी।

दोपहर को राज और उसके दोस्त कन्हा, मोहित कुएं के चारों ओर का चौपाल बनाते थे। चौपाल वो नहीं था जहां बड़े बैठते थे, लेकिन गांव की धूल पर बैठकर वह अपनी दुनिया खुद बनाते थे। वे कंचों का खेल खेलते, गिल्ली-डंडा खेलते, और कुएं को देखते हुए किस्सों का आविष्कार करते।

एक दिन कन्हा ने कहा, ‘सुनो, कुआं जादुई है। इसमें से निकला हर पानी का अपना मन है। अगर खुश होकर पानी निकालो तो वह मीठा रहता है, अगर गुस्से में निकालो तो कड़वा हो जाता है।’ राज को यह कहानी पसंद आई। उसने हर दिन अपने मन में प्यार और खुशियां भरकर दादी के साथ पानी निकालने लगा।

जब दादी को बुखार आ गया, तो राज हर सुबह खुद ही कुएं पर जाता था। उस पुराने कुएं से पानी निकालते समय उसे महसूस होता था कि उसकी दादी जल्दी ठीक हो जाएगी। गांव के सभी लोग उस बच्चे को देखते थे और मुस्कुराते थे। दादी ठीक हो गईं।

साल बीते। राज शहर चला गया। लेकिन जब भी वह गांव लौटता, सबसे पहले उसी पुराने कुएं पर जाता। वहीं उसे अपने बचपन की सारी यादें मिलती थीं – कन्हा की हंसी, गिल्ली-डंडा की गड़-गड़ाहट, दादी की प्यार भरी नजर। कुआं अब भी अपना पानी देता था, और राज हर बार उसी खुशी के साथ पानी पीता, जैसे कभी पिया करता था।

वह समझ गया कि कुआं केवल पानी नहीं देता – वह यादें देता है, प्यार देता है, और गांव की आत्मा होता है। हर पत्थर, हर निशान एक कहानी बयां करता है।


🪔 सीख: पुरानी यादें और छोटी-छोटी चीजें ही हमारी ज़िंदगी को सबसे खूबसूरत बनाती हैं। गांव, परिवार और प्यार का रिश्ता सदा के लिए हृदय में बसा रहता है।

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