तीन मित्र और सोने की खान
एक घने जंगल में तीन मित्र रहते थे — एक बुद्धिमान लोमड़ी, एक मजबूत हाथी और एक सीधा-सादा खरगोश। तीनों एक-दूसरे को प्रेम करते थे और हमेशा साथ रहते थे। एक दिन जब वे जंगल में भटक रहे थे, तो उन्हें एक पुरानी गुफा मिली। उसके अंदर मिट्टी हटाने के बाद उन्हें चमकते सोने के सिक्कों का ढेर दिख गया।
लोमड़ी की आंखें चमक गईं। उसने कहा, ‘यह सोना हमारा है! हम इसे बांट लेंगे।’ लेकिन हाथी ने आपत्ति की और कहा, ‘नहीं, मैंने इसे खोदकर निकाला है, इसलिए यह सब मेरा है।’ खरगोश शांति से बोला, ‘दोस्तों, हम तीनों का परिश्रम था। यह सोना तीनों को बराबर मिलना चाहिए।’
लोमड़ी ने चालाकी से कहा, ‘खरगोश, तुम तो कमजोर हो। तुम्हें क्या अधिकार है?’ हाथी ने गुस्से में कहा, ‘मैं सबसे ताकतवर हूं, इसलिए यह सोना मेरा होगा।’ दोनों लड़ने लगे। खरगोश ने उन्हें समझाया, ‘मित्रों, क्या यह सोना हमारी दोस्ती को खत्म कर देगा? एक बार जब हम अलग हो गए, तो शिकारी हमें आसानी से पकड़ सकते हैं।’
लेकिन लोमड़ी और हाथी दोनों लालच में अंधे हो गए। उन्होंने खरगोश की सुनी ही नहीं। अगले दिन, जब वे सोना बांटने के लिए गुफा की ओर जा रहे थे, तो एक शिकारी और उसके कुत्ते उन्हें मिल गए। लोमड़ी भाग गई, हाथी ने शिकारी को मार भगाया, लेकिन भोली खरगोश पकड़ी गई।
जब हाथी और लोमड़ी को खरगोश की पीड़ा का पता चला, तो उन्हें गहरा पश्चाताप हुआ। वे तेजी से गुफा की ओर दौड़े। उन्होंने मिलकर शिकारी को खदेड़ दिया और खरगोश को बचा लिया। उस दिन उन्हें समझ आ गया कि सोने की खान से ज्यादा कीमती उनकी दोस्ती है। उन्होंने सोना फेंक दिया और तीनों गहरे जंगल में चले गए, जहां वे शांति से रहते हैं।
🪔 सीख: धन और लालच दोस्ती और विश्वास को नष्ट कर देते हैं। सच्चा मित्र किसी भी संपत्ति से कीमती होता है। एकता में ही हमारी ताकत और सुरक्षा है।





