तीन मित्र और सोने की खान

एक समय की बात है, जब एक घने जंगल में एक चतुर लोमड़ी, मेहनती चींटी और दयालु हाथी तीन अच्छे मित्र रहते थे। वे हर दिन एक बरगद के पेड़ के नीचे मिलते और अपनी बातें करते थे।

एक दिन जब वे टहलते हुए एक पुरानी गुफा के पास पहुँचे, तो उन्हें जमीन में कुछ चमकीली चीज़ें दिखाई दीं। लोमड़ी ने तुरंत पहचान लिया – यह सोने के सिक्के थे! ‘देखो, हम अमीर हो गए!’ लोमड़ी खुशी से चिल्लाई।

तीनों ने मिलकर सोने को निकालने का काम शुरू किया। चींटी छोटे सिक्कों को संभालती, हाथी बड़े पत्थरों को हटाता, और लोमड़ी योजना बनाती। महीने भर की मेहनत के बाद उन्हें सौ सोने के सिक्के मिल गए।

अब समस्या उठ खड़ी हुई। लोमड़ी बोली, ‘सोना मेरी बुद्धिमत्ता से मिला, इसलिए आधा मेरा होना चाहिए।’ चींटी ने कहा, ‘मैंने सबसे ज्यादा मेहनत की, तो मुझे ज्यादा हिस्सा चाहिए।’ हाथी चुप रहा, लेकिन उसके चेहरे पर निराशा थी।

उस रात को भूखे कुत्तों का एक झुंड जंगल में आया। लोमड़ी अपनी बुद्धि से भाग गई। चींटी अपने छोटे पैरों से दौड़ गई। लेकिन हाथी ने उन दोनों को बचाने के लिए कुत्तों से लड़ाई की। हालांकि वह घायल हो गया, लेकिन दोनों की जान बच गई।

सुबह जब लोमड़ी और चींटी घायल हाथी के पास पहुँचे, तो उन्हें अपनी गलती समझ आ गई। लोमड़ी ने कहा, ‘मैंने सोचा कि सोना सबसे महत्वपूर्ण है, पर तुम्हारी दोस्ती कहीं ज्यादा कीमती है।’ चींटी ने जोड़ा, ‘हाँ, अकेली मेहनत बेकार है। सच्ची दोस्ती में सब कुछ साझा होता है।’

उसके बाद तीनों ने सोने को गांव के जरूरतमंद बच्चों के स्कूल के लिए दान कर दिया। वे समझ गए कि असली धन तो मित्रता, विश्वास और एक-दूसरे के लिए समर्पण में है। उस दिन के बाद उनकी दोस्ती और भी मजबूत हुई, और जंगल में सब उन्हें सच्चे मित्रों के रूप में जानने लगे।


🪔 सीख: धन और संपत्ति क्षणभंगुर होती है, परंतु सच्ची मित्रता और आपस में सहायता करना जीवन की असली संपदा है। लालच से बचकर एक-दूसरे को प्राथमिकता देने वाला समाज ही सुखी और समृद्ध होता है।

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