एक समय की बात है, जब एक घने वन में तीन मित्र रहते थे – एक चतुर लोमड़ी, एक मेहनती चूहा और एक दिल से अच्छा हिरण। तीनों को एक-दूसरे से बहुत प्रेम था और वे हमेशा साथ रहते थे।
एक सर्दी का दिन था जब चूहे को वन के किनारे एक भूली-भाली पुरानी झोपड़ी के पास सोने का दाना मिला। उसकी आँखें चमक गईं। लोमड़ी जब यह देखी, तो उसके मन में लालच आ गया। ‘यह सोना सब मेरा होना चाहिए,’ उसने सोचा। उसने चूहे से कहा, ‘यह दाना मेरा है क्योंकि मैं इसे पहले देख सकती हूँ। तुम तो सिर्फ पैरों से चल सकते हो।’
चूहा बहुत दुःखी हो गया। हिरण ने दोनों की बातें सुनीं और उन्हें समझाने का फैसला किया। उसने कहा, ‘प्रिय मित्रों, यह सोना अकेले किसी के लिए नहीं है। हम तीनों मिलकर इससे क्या कर सकते हैं, यही सोचना चाहिए।’
हिरण की बुद्धिमान बातें सुनकर लोमड़ी को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने कहा, ‘तुम ठीक कह रहे हो। चूहा भाई, मुझे माफ कर दो। अब हम इस सोने को गांव के किसान के पास ले जाएंगे और उससे बीज खरीदेंगे।’
तीनों मित्र सोना लेकर गांव पहुंचे। किसान ने उन्हें बहुत अच्छी गेहूं के बीज दे दिए। चूहे ने अपनी सूंड से बीजों को जमीन में दबाया, हिरण ने उन्हें धूप और पानी के साथ बड़े करने में मदद की, और चतुर लोमड़ी ने जंगली जानवरों से फसल की रक्षा की।
कुछ महीनों बाद, उन्होंने सोने के दाने से भी सुंदर सुनहरी फसल काटी। वह अनाज न सिर्फ उन तीनों के लिए, बल्कि पूरे वन के जानवरों के लिए भोजन बन गया। सर्दी आई, तो सभी जानवरों के पास भरपूर खाना था।
लोमड़ी को अब समझ आ गया कि लालच से कोई भी खुशी नहीं मिलती, लेकिन एक-दूसरे को साथ देने से, मेहनत से और प्रेम से पूरी दुनिया को खुशियां दी जा सकती हैं। तीनों मित्र अब और भी गहरे प्रेम से जुड़ गए।
उस दिन से वह गांव के लोग भी आश्चर्य करते कि जंगल के जानवर कैसे एक-दूसरे की इतनी अच्छी तरह मदद करते हैं। और सभी को यह सीख मिलती है कि मेहनत, प्रेम और एकता से कोई भी असंभव काम संभव हो जाता है।
🪔 सीख: लालच और अकेली सोच से कोई भी सुख नहीं मिलता। सच की खुशी तब आती है जब हम अपने मित्रों और परिवार के साथ मेहनत करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। एकता और सहकार से ही सच का खजाना मिलता है।


