दीये की रोशनी, दिल की खुशी
एक बुजुर्ग दादी और उसकी पोती छोटू को समझ आता है कि असली दिवाली केवल घरों को रोशन करने का नाम नहीं, बल्कि दूसरों के दिलों को खुशी से भरने का त्योहार है।

एक बुजुर्ग दादी और उसकी पोती छोटू को समझ आता है कि असली दिवाली केवल घरों को रोशन करने का नाम नहीं, बल्कि दूसरों के दिलों को खुशी से भरने का त्योहार है।

नौ साल का राज अकेली दादी के लिए दिवाली की रोशनी और खुशियां खुद लेकर आया। मिट्टी के दीये, रंग, और बच्चों की हंसी से भरा आंगन एक चमत्कार बन गया।

दादी की अकेली दिवाली को गांव की सबसे गरीब परिवार ने कैसे खुशियों का दीया बना दिया, और कैसे असली दिवाली प्रेम और करुणा की रोशनी से जगमगाई।

जब रीना ने पहला दीया जलाया, तो दादी की आँख से आंसू निकल गए। ‘मेरी बिटिया,’ दादी ने कहा, ‘तुम्हारी प्रेम की रोशनी मेरे अंधकार को दूर कर गई।’