मेले का सपना
मेले का दिन आ गया। लाल, पीले, नीले और हरे रंगों से सजे झूले आसमान को छू रहे थे। मुन्ना के सपनों को अब पंख मिल गए थे।

मेले का दिन आ गया। लाल, पीले, नीले और हरे रंगों से सजे झूले आसमान को छू रहे थे। मुन्ना के सपनों को अब पंख मिल गए थे।

छोटे राज के लिए गांव का मेला सिर्फ झूले और खिलौने नहीं थे – यह तीन पीढ़ियों को जोड़ने वाली कहानियों का जादू था।