मेले का जादूगर और खोई हुई हँसी
गाँव के वार्षिक मेले की तैयारी पूरे महीने से चल रही थी। बस्ती के हर घर में उत्साह था, पर नौ वर्षीय राधा का मन उदास रहता था। उसके पिता तीन साल पहले शहर चले गए थे और राधा ने तब से कभी खुलकर हँसा नहीं। दादी जी कहती थीं कि उसकी हँसी घर का सूरज है, पर वह हँसी कहीं खो गई थी।
मेले का दिन आया। पूरा गाँव रंगों में डूब गया। झूले, नाटे, खिलौनों की दुकानें, और मिठाई की महक हवा में थी। पर राधा सब कुछ देखता हुआ भी मन से ग़ैर-हाज़िर रहता। तभी गाँव के चौराहे पर एक अलग ही भीड़ जमा हो गई। एक बुज़ुर्ग जादूगर अपने संगी बंदर के साथ तमाशे दिखा रहे थे। उनके बाल सफेद थे, पर आँखें युवा और चमकदार थीं।
जादूगर ने भीड़ को देखा और मुस्कुराए। उन्होंने अपनी जादू की छड़ी हवा में घुमाई, और हज़ारों रंगीन कागज़ की तितलियाँ आसमान में उड़ने लगीं। बच्चों का चीखना-पुकारना शुरू हो गया। पर राधा खामोश खड़ा था।
जादूगर की नज़र राधा पर पड़ी। वे आगे बढ़े और उससे पूछा, ‘बेटा, तुम्हारी हँसी को क्या हो गया?’ राधा के मुँह से बस एक साँस निकली। जादूगर ने अपनी झोली से एक पत्थर निकाला और कहा, ‘यह साधारण पत्थर नहीं है। इसमें सारी खोई हुई चीज़ें रहती हैं।’
उन्होंने पत्थर को जमीन पर रखा और अपनी छड़ी से छुआ। पत्थर से एक सुगंध आई—उसके पिता की कमीज़ की गंध। फिर उन्होंने फिर से छड़ी चलाई, और पत्थर से एक गीत निकला—वही गीत जो उसके पिता उसे सोते समय गाते थे। और तीसरी बार, पत्थर से राधा की बचपन की हँसी निकली—वह पुरानी, मासूम, बेफ़िक्र हँसी।
राधा की आँखों में आँसू आ गए। पर ये आँसू खुशी के थे। उसके होंठों पर एक मुस्कुराहट आई, फिर एक हल्की हँसी, फिर ज़ोर की हँसी। पूरा गाँव उसकी हँसी को सुनकर मुग्ध हो गया।
जादूगर ने पत्थर राधा को दे दिया और कहा, ‘इसे सँभालकर रखना। जब भी तुम्हें लगे कि कुछ खो गया है, इसे छुओ और याद करो। सब कुछ अपने आप वापस आ जाएगा।’ फिर वे अपने बंदर के साथ गाँव से चले गए, पर राधा की हँसी वहीं रह गई—गाँव के हर कोने में, हर दिल में।
उस रात जब राधा के पिता की चिट्ठी आई, राधा ने अपनी माँ को अपनी नई हँसी से ही समझा दिया कि वह ठीक है। और दादी जी कहा करती थीं कि उस मेले के बाद राधा की हँसी न केवल वापस आई, बल्कि और भी सुरीली हो गई।
🪔 सीख: जीवन की कठिनाइयाँ हमसे कुछ सुख छीन सकती हैं, पर वे सदा के लिए खो नहीं जातीं। प्यार, यादें और आस्था से हम उन्हें फिर से पा सकते हैं। असली जादू तब होता है जब हम अपने दिल की आवाज़ सुनते हैं।



