एक समय की बात है, एक पहाड़ी गांव के पास तीन बकरियाँ रहती थीं। बड़ी बकरी का नाम मीरा, मझली का नाम सीता और सबसे छोटी का नाम रानी था। तीनों दिन भर घास चरती थीं और शाम को अपने बाड़े में लौट आती थीं। वे एक-दूसरे पर पूरी तरह विश्वास करती थीं और कभी अलग नहीं होती थीं।
एक दिन एक भूखा भेड़िया गांव के जंगल से बाहर आया। उसने तीनों बकरियों को देखा और मन ही मन में एक चाल सोचने लगा। भेड़िया मीरा के पास गया और कहा, ‘बहन, तुम बहुत थकी लगती हो। सुनो, अगर तुम अपनी दोनों बहनों को मुझे दे दो, तो मैं तुम्हें सबसे अच्छी घास वाली घाटी का रास्ता बता दूंगा जहाँ कोई शिकारी नहीं है।’ मीरा ने गुस्से से भेड़िये को मना कर दिया।
फिर भेड़िया सीता के पास गया और कहा, ‘तुम बहुत सुंदर हो। अगर तुम अपनी दोनों बहनों को मेरे लिए अलग कर दो, तो मैं तुम्हें इतने सोने के सिक्के दूंगा कि तुम पूरे गांव में राजकुमारी बन जाओ।’ सीता ने भी साफ इनकार कर दिया और कहा, ‘मेरी बहनों के बिना वह सोना मेरे किस काम का है?’
अब भेड़िया छोटी रानी के पास गया और उसे डराया-धमकाया, ‘अगर तुम अपनी बहनों के साथ अलग हो जाओ, तो मैं तुम्हें नहीं खाऊंगा। लेकिन अगर तुमने मना किया, तो मैं सभी तीनों को खा जाऊंगा।’ रानी डर गई, लेकिन उसके दिल में एक सवाल जगा।
रानी अपनी दोनों बहनों के पास गई और सब कुछ बताया। मीरा और सीता ने रानी को समझाया, ‘भेड़िया हमें डराकर अलग करना चाहता है क्योंकि वह जानता है कि जब हम तीनों साथ हैं, तो उसे कभी नहीं खा सकता। हमारी शक्ति हमारे साथ-साथ रहने में है।’
अगले दिन जब भेड़िया फिर से आया, तो तीनों बकरियाँ एक साथ उसके सामने खड़ी हो गईं। जब भेड़िया उन पर हमला करने लगा, तो तीनों ने अपने सींगों से मिलकर उसे इतनी जोर से मारा कि वह भाग गया और कभी फिर वहाँ नहीं आया। तीनों बकरियाँ खुश रहीं और उन्होंने सीखा कि एकता ही असली ताकत है।
🪔 सीख: एकता में शक्ति निहित है। जब हम एक-दूसरे के साथ रहते हैं और एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं, तो कोई भी दुश्मन हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अलग होने से दुर्बलता आती है, लेकिन एकजुट रहने से हर विपत्ति पर जीत मिलती है।





