गांव के दो भाई

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राजेंद्र और मोहन दोनों भाई एक ही गांव में रहते थे, पर उनके बीच पिछले पांच साल से भारी दूरी थी। उनके पिता की मृत्यु के बाद जब तीस बीघे खेत को बांटने का समय आया, तो छोटी सी गलतफहमी बड़े झगड़े में बदल गई। राजेंद्र को लगा कि मोहन ने उसे धोखा दिया है, और मोहन समझता था कि राजेंद्र ने उसका हिस्सा दबा लिया है। दोनों ने एक-दूसरे से बात करना बंद कर दिया। गांव के चौपाल पर जब वे एक-दूसरे को देखते, तो अलग-अलग तरफ चले जाते थे।

उसी गांव में बुढ़िया दादी रहती थीं, जिन्होंने दोनों भाइयों को पाला-पोसा था। वह हर दिन अपने टूटे आंगन में बैठकर चिंता करती थीं कि इन दोनों की दोस्ती कब लौटेगी। एक बारिश की शाम, जब पूरा आसमान काला था, दादी को अचानक तेज़ बुखार आ गया। गांव में कोई हड़कंप मच गया। राजेंद्र को जब खबर मिली, तो वह दौड़ा-दौड़ा दादी के घर पहुंचा। उसी क्षण मोहन भी बारिश में भिगा हुआ दादी के दरवाज़े पर पहुंच गया।

दोनों भाइयों की नज़रें एक-दूसरे से टकराईं। राजेंद्र के मन में पहली बार पांच सालों में भाई के लिए चिंता महसूस हुई। मोहन के होठों पर पहली बार भाई का नाम लेने की हिम्मत आई। दादी बुरी तरह बीमार थीं, और उन्हें तुरंत शहर के डॉक्टर के पास ले जाना था। राजेंद्र और मोहन दोनों ने बिना एक-दूसरे से झगड़े, बिना किसी शर्त के एक साथ काम किया। राजेंद्र ने दादी को गोद में लिया, और मोहन ने बारिश में अपने बैलगाड़ी को तैयार किया। पूरे रास्ते भर, दोनों दादी के हाथ पकड़े रहे।

डॉक्टर ने दो दिन बाद कहा कि दादी ठीक हो जाएंगी। दादी जब होश में आईं, तो राजेंद्र और मोहन दोनों को एक-दूसरे के साथ बैठा देखकर रो पड़ीं। उन्होंने दोनों भाइयों को अपने पास बुलाया और कमजोर आवाज़ में कहा, ‘बेटा, ज़मीन तो ज़मीन ही है। वह कहीं नहीं जाएगी, पर भाई का प्यार तो एक बार चला जाए तो फिर नहीं लौटता।’ दोनों भाइयों के चेहरे पर शर्मिंदगी उतर आई। राजेंद्र ने मोहन का हाथ पकड़ा और कहा, ‘भैया, मुझसे गलती हुई है। मुझे माफ कर दो।’ मोहन की आंखों में खुशियों के आंसू बह गए। वह अपने भाई को गले लगा लिया।

दादी के ठीक होने के बाद, दोनों भाइयों ने अपना सारा झगड़ा भूल जाया। उन्होंने मिल-जुलकर न केवल अपने खेतों को काम में लिया, बल्कि दादी की सेवा भी साथ-साथ की। गांव के लोग आश्चर्य से देखते थे कि कैसे इन दोनों की दोस्ती फिर से जन्म ले गई। सच है, कि कभी-कभी ज़िंदगी के सबसे बड़े सबक गांव के बुज़ुर्गों के मुंह से ही निकलते हैं।


🪔 सीख: भाई-भतीजे का प्यार और रिश्ता ज़मीन-जायदाद से कहीं ज्यादा कीमती होता है। समय पर माफी मांगना और भूल जाना ही असली बहादुरी है। जब तक साथ हो, तब तक प्यार को महत्व देना चाहिए।

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