गांव में मानसून की पहली बारिश आने वाली थी। आसमान काले बादलों से ढंका हुआ था और हवा में मिट्टी की खुशबू थी। नौ साल की मीरा अपनी दादी के साथ घर के आंगन में चना बीज रही थी, जब अचानक आसमान में गड़गड़ाहट सुनाई दी। “बारिश आने वाली है!” दादी ने कहा और हंस पड़ीं।
गांव के बच्चों में खुशी की लहर दौड़ गई। मीरा, उसके भाई राज, और पड़ोसी परिवार के बच्चे सब खेत की ओर दौड़ पड़े। आंगन से पार करके बड़ी सड़क पर पहुंचते ही, सब को एक आश्चर्यजनक दृश्य दिखाई दिया। खेत के बीचों-बीच एक नीले-हरे रंग का मोर खड़ा था, उसकी लंबी पूंछ मार्जिता हुई थी। मीरा की सांस रुक गई।
पहली बूंदें टपकने लगीं। ठंडी-ठंडी बारिश शुरू हुई, और उसी पल मोर ने कुछ अद्भुत किया। वह अपनी सुंदर पूंछ को ऊपर उठाकर पंखों को फैलाने लगा। हजारों नीली, हरी और सोने जैसी पंखुड़ियां एक साथ खिल उठीं। फिर मोर नाचने लगा। उसका नृत्य इतना मंत्रमुग्ध करने वाला था कि सभी बच्चे मूक दर्शक बन गए।
“देखो, देखो!” छोटी सीमा चिल्लाई। मोर की बारिश के बीच कताई करने वाली हरकतें देखकर सब अवाक रह गए। बारिश तेज हो गई, और मोर का नृत्य और भी जोरदार हो उठा। गीली मिट्टी पर उसके पैरों की थाप, उसकी पूंछ की लहरदार गति, और आसमान से गिरती बूंदों का अद्भुत संयोजन एक जादुई दृश्य बन गया।
मीरा को याद आया कि दादी कहती थीं, “मोर बारिश का संगीत सुनकर नाचता है। यह प्रकृति का सबसे सुंदर नृत्य है।” आज उसने वह नृत्य अपनी आंखों से देखा था। हर बूंद एक ताली थी, हर गड़गड़ाहट एक संगीत था, और मोर उसके मध्य एक परी की तरह नाच रहा था।
बारिश रुकते ही मोर एक पल के लिए रुका, फिर धीरे-धीरे अपनी पूंछ समेटकर खेत में चला गया। बच्चों की आंखों में अश्रु थे, लेकिन उनके दिल खुशी से भरे हुए थे। उस दिन के बाद, हर मानसून में गांव के बच्चे खेत में जाते और मोर की बारिश के नृत्य की प्रतीक्षा करते।
🪔 सीख: प्रकृति के साथ सामंजस्य रखना जीवन की सबसे सुंदर चीज है। हर ऋतु, हर बारिश, हर पल एक नया संगीत और नया नृत्य लेकर आती है। जीवन के छोटे पलों में ही सबसे बड़े आश्चर्य और खुशियां छिपी होती हैं।


