सरसों के सपने

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गाँव के सबसे बड़े सरसों के खेत के पास दो लड़कियों की दोस्ती थी जो उतनी ही पीली और उजली थी जितना सरसों का फूल। राधा जमींदार की बेटी थी और मीरा उसके मालियों की बेटी। उनकी उम्र बस आठ साल थी जब उनकी पहली मुलाकात हुई थी—सरसों के खेत के किनारे, जहाँ गाँव की मिट्टी सुनहरी धूप में चमकती थी।

राधा अपने हीरे के कंगन के साथ महीन मलमल की साड़ी में खेल रही थी, जबकि मीरा सादे सूती कपड़ों में पानी की मटकी लिए चल रही थी। पर सरसों के फूलों के बीच कोई फर्क नहीं रहा। दोनों ने एक साथ फूलों की माला बनाई, और उसी दिन से उनका रिश्ता शुरू हुआ।

हर बसंत में जब सरसों के खेत में पीले फूलों की बारिश हो जाती, दोनों लड़कियाँ सुबह-सुबह अपने घरों से निकल जातीं। राधा अपनी अम्मा को कहती कि वह स्कूल जा रही है, पर सच तो यह था कि वह सरसों के खेत में मीरा की प्रतीक्षा करती थी। मीरा अपनी माँ की चूल्हे का काम निपटाकर आती थी।

उन दोनों की दुनिया थी—हरी-भरी क्यारियाँ, ऊँची-नीची मेड़ें, और चारों ओर फैले पीले फूलों का अनंत सागर। वे सरसों के पकने से पहले ही उसके पौधों को छूती-फिराती, उनकी खुशबू को जी भर के सूँघती। दोपहर की तेज धूप में भी वे रुकती नहीं, सिर्फ एक-दूसरे का हाथ पकड़े खेत के इस कोने से उस कोने तक दौड़ लगातीं।

एक दिन राधा की माँ ने कहा कि वह अगले महीने शहर चली जाएगी, क्योंकि राधा को बड़े स्कूल में भेजना है। जब राधा ने यह बात मीरा को बताई, तो दोनों की आँखें भर गईं। उस शाम को वे सरसों के खेत में सूर्यास्त देखने गईं। आसमान नारंगी और गुलाबी रंग में रंग गया था, और सरसों के पत्ते चाँदी जैसे चमक गए थे।

मीरा ने अपनी जेब से दो पीले सरसों के फूल निकाले और राधा को दिए। राधा ने अपने गले का पीतल का तागा उतारा और मीरा को पहना दिया। दोनों ने वादा किया कि हर बसंत में, जब भी सरसों के फूल खिलेंगे, वे इसी खेत में एक-दूसरे को ढूँढेंगी।

सालों बाद, जब राधा अपने पति के साथ गाँव लौटी, तो सबसे पहले उसी सरसों के खेत की ओर दौड़ी। वहाँ मीरा पहले से ही खड़ी थी—अब वह एक महिला थी, पर उसके गले में वही पीतल का तागा था। उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, और सरसों के पीले फूल उनके चारों ओर बहने लगे, मानो गाँव की मिट्टी ही उनकी दोस्ती को मुबारक दे रही हो।


🪔 सीख: सच्ची दोस्ती न जाति देखती है, न दौलत—वह तो सिर्फ दिलों को जोड़ती है और हर बहार में फूलों की तरह खिल उठती है।

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