गांव के किनारे जहां सरसों के पीले खेत आसमान तक फैले होते थे, वहां राज और मीरा की दोस्ती उतनी ही खूबसूरत थी जितना वह मौसम। राज नौ साल का था, काली घुंघराली बाल और खुशमिजाज़ आंखों वाला लड़का। मीरा छह साल की, दुबली-पतली, लेकिन हमेशा राज के पीछे दौड़ने को तैयार। उनके घर एक दूसरे के सामने थे और सरसों के खेत उनका खेल का मैदान।
हर सुबह जब सूरज निकलता, राज मीरा को खेतों में ले जाता। पीले फूलों के बीच भागते, हंसते, गिरते और फिर उठ जाते। राज मीरा के लिए सरसों के फूलों की माला बनाता और उसके सिर पर रख देता। ‘तुम परी हो,’ वह कहता। मीरा खिलखिलाकर हंसती और अपनी दोनों भुजाएं फैलाकर खेतों में उड़ने की कोशिश करती।
एक दिन जब सरसों की बालियां सोने जैसी हो गईं, मीरा को बुखार आ गया। वह कई दिन बीमार रहा। राज हर शाम उसके घर के आंगन में खड़ा हो जाता, अपनी खिड़की पर नज़र रखते हुए। जब मीरा ठीक हुई, वह पहली बार खेतों में बाहर निकली। उसके पैर कमजोर थे।
राज ने मीरा का हाथ पकड़ा और धीरे-धीरे सरसों के खेत तक ले गया। जहां वह हमेशा खेलते थे, वहां अब सरसों कट चुकी थी। खाली खेत को देखकर मीरा के चेहरे पर उदासी आ गई। ‘खेल खत्म हो गया,’ वह बोली।
राज ने मीरा को अपनी पीठ पर बैठा लिया और उसे खेत के कोने में ले गया। वहां कुछ सरसों के पौधे अभी भी बचे थे, जिन्हें किसी ने काटा नहीं था। पीले फूल अभी भी हवा में झूम रहे थे। ‘देख, मीरा,’ राज बोला, ‘कुछ फूल हमारे लिए बचे हैं। अगले साल फिर से ये खेत पीले हो जाएंगे। हम फिर से खेलेंगे।’
मीरा ने राज के कंधे से अपना सिर झुकाया और एक फूल तोड़कर अपने बालों में लगा लिया। उसी शाम, राज ने अपनी दादी से एक सरसों के पौधे की बीज मांगी। वह और मीरा ने मीरा के आंगन में एक गमले में उसे लगा दिया।
सर्दियां गई, गर्मी आई, फिर से बारिश हुई। जब अगली सरसों की फसल आई, तो मीरा का गमला भी फूलों से लहलहा रहा था। राज ने मीरा से कहा, ‘यह हमारा खेत है, सिर्फ हमारा।’ मीरा ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘और यह हमारी दोस्ती का रंग है।’
वह पीला रंग, वह सुगंध, वह खिलखिलाहट, सब कुछ उनकी यादों में हमेशा के लिए बस गया। सरसों के खेत हर साल आते और जाते, लेकिन राज और मीरा की दोस्ती के बीज कभी नहीं मुरझाते।
🪔 सीख: सच्ची दोस्ती मौसम और समय की परवाह नहीं करती। छोटी-छोटी चीजें, जो हम एक दूसरे के लिए करते हैं, वह हमारे रिश्तों को हमेशा के लिए पीला, सुनहरा और खुशबूदार बना देती हैं।


