रामपुर गांव की गलियों में उस साल कुछ अलग ही रंग था। बूढ़ी दादी माता अपने घर के आंगन में बैठी थीं, जहां उन्होंने पचास साल से दिवाली मनाई थी। लेकिन इस बार उनके हाथ कांप रहे थे। उनके बेटे शहर चले गए थे, पोते की नौकरी विदेश में लग गई थी। घर सूना था, सन्नाटा भरा था। दादी माता ने मिट्टी के दीये खरीदने की बात सोची, पर मन उदास रहा।
गांव का सबसे छोटा लड़का, छह साल का राज, अपनी दादी को ऐसे उदास देखकर नहीं रह सका। राज उनके घर का सबसे नियमित मेहमान था। उसने दादी के पास जाकर कहा, ‘दादी माता, मैं आपके साथ दिवाली मनाऊंगा। चलिए, हम पूरे गांव को दिवाली की रोशनी से जगमगा देंगे।’ उसके चेहरे पर मासूम मुस्कुराहट थी।
दिवाली की शाम को कुछ जादू हुआ। गांव की महिलाएं दादी माता के घर के आंगन में इकट्ठा हो गईं। उन्होंने रंगोली बनाने का फैसला किया। चूने के रंग, हल्दी की पीली खुशबू, और लाल मिट्टी से आंगन का हर कोना खिल उठा। छोटी लड़कियां रंगों के साथ खेलती रहीं, जबकि बड़ी महिलाएं ज्यामितीय आकार बनाती रहीं।
राज और गांव के अन्य बच्चों को मिट्टी के दीये तैयार करने का काम दिया गया। हर दीये को प्रेम से तोल-मोल कर रखा गया। दादी माता ने सिखाया कि कैसे दीये को सहल से रखना है, कैसे उसमें तेल डालना है। राज के हाथों में पहला दीया तैयार हुआ, वह गांव का सबसे सुंदर दीया था – उसमें छोटे-छोटे फूल की डिजाइन थी।
जैसे-जैसे सूरज डूबा, रात की काली चादर गांव पर फैल गई। लेकिन तब दिवाली की सच्ची रोशनी शुरू हुई। गांव के हर घर से, हर चौपाल से मिट्टी के दीयों की रोशनी निकलने लगी। पूरा गांव सोने की रोशनी में नहा गया। दीयों की लपटें हवा में नाचती रहीं, मानो वे गांव के दिलों की बातें कह रही हों।
रात भर गांव के लोग एक-दूसरे के घर गए। खीर, हलवा, और मठाई का स्वाद चखते रहे। पड़ोसियों के बीच पुरानी कड़वाहट भूल गई। दादी माता के चेहरे पर खुशी की वह चमक वापस आ गई, जो सालों से गायब थी। राज उनकी गोद में बैठा, दिवाली की रात को अपने दिल में समेता रहा।
उस रात, जब पटाखों की गूंज गांव भर में गूंजी, तो ऐसा लगा कि गांव के हर परिवार का दिल एक ही धड़कन से धड़क रहा है। मिट्टी के दीये सिर्फ घरों को रोशन नहीं कर रहे थे – वे रिश्तों को भी जगा रहे थे, भावनाओं को भी चमका रहे थे। यही दिवाली की सच्ची शक्ति थी – एक पूरे गांव को परिवार बना देना।
🪔 सीख: दिवाली का असली रोशनी मिट्टी के दीयों में नहीं, बल्कि हृदय की प्रेम और सम्बंधों की गहराई में निहित है। भौतिक सुख से ज्यादा कीमती हैं एक-दूसरे के साथ बिताए गए पल और परिवार के बंधन।

