कुम्हार का चाक
जब रामू के हाथ मिट्टी को छूते हैं, तो कच्ची मिट्टी एक जीवंत घड़े में बदल जाती है। एक युवा शहरी लड़का जब कुम्हार के चाक के पास बैठता है, तो उसे जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाई पड़ता है।

जब रामू के हाथ मिट्टी को छूते हैं, तो कच्ची मिट्टी एक जीवंत घड़े में बदल जाती है। एक युवा शहरी लड़का जब कुम्हार के चाक के पास बैठता है, तो उसे जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाई पड़ता है।

गांव के कुम्हार दादा के हाथों में तीस साल का अनुभव था। उनके बेटे राजू को सब्र से सीखना पड़ा कि मिट्टी को तराशना सिर्फ कला नहीं, बल्कि जीवन सीखना है।

कुम्हार दादा के चाक पर बैठा एक लड़का सीखता है कि जीवन में सफलता के लिए धैर्य, प्रेम और निरंतर प्रयास ज़रूरी है।