बरगद की बहू
गांव के चौपाल पर सबसे पुराना बरगद था। उसकी जटाएं धरती से जुड़ी थीं, शाखाएं आसमान को छूती थीं। दादा कहते थे कि इसी पेड़ के नीचे उनके दादा का विवाह हुआ था, जब अंग्रेज़ राज में भी भारत आज़ाद था—अपनी परंपराओं में।
सीमा ने पहली बार इस बरगद को देखा था अपनी विदाई की रात। नई बहू, अजनबी गांव, सब कुछ अपरिचित। रात भर वह सोई नहीं। सुबह जब वह आंगन में निकली, तो बरगद की छाया उसके चेहरे पर पड़ी—ठंडी, शांत, सुकून देने वाली।
दादा अम्मा उसे वहीं बैठा पाई। उन्होंने बैठकर कहा, “इस पेड़ के नीचे मैंने भी अपना पहला दिन गुज़ारा था। डर और अकेलापन था, लेकिन यह पेड़ हमेशा सुनता है।” सीमा ने दादा अम्मा का हाथ पकड़ा।
साल बीतते गए। हर शाम सीमा बरगद के नीचे बैठती। बसंत में जब नई कोंपलें निकलतीं, तो दादा अम्मा कहतीं—”देख, नई शुरुआत, हर साल।” सर्दी में जब पत्ते गिरते, तो वह कहतीं—”पुरानी चीज़ें जाएंगी, नई आएंगी।”
सीमा के बेटे को पहली बार इस पेड़ के नीचे कहानियां सुनीं। बारिश में जब बूंदें पत्तों पर पड़तीं, तो वह कहती—”यह बूंदें सदियों से गिरती हैं। राजा, रानी, किसान, सब ने यह देखा है।” बेटे की आंखें खुली रह जातीं।
एक दिन दादा अम्मा बीमार पड़ीं। बरगद के नीचे की सीमा की बैठकों में अब तन्हाई थी। लेकिन जब दादा अम्मा ठीक हुईं और फिर से उसी छाया में बैठीं, तो सीमा ने देखा—उनके चेहरे पर शांति थी। “इस पेड़ ने हमें बांध रखा है,” दादा अम्मा ने हाथ पकड़ते हुए कहा। “तुम मेरी बहू हो, पर तुम इसी बरगद की भी बहू हो।”
जब सीमा अपने बेटे के विवाह की तैयारी करने लगी, तो उसे याद आया—उसकी बहू भी पहली बार इसी गांव आएगी। शाम को उसने अपने बेटे को बरगद के नीचे ले जाकर कहा, “इसके नीचे से ही हमारी कहानी शुरू होती है।”
आज जब गांव में कोई भी सलाह लेता है, तो बरगद के नीचे जाता है। दादा अम्मा अब नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ उसी छाया में रहती है। सीमा की पोती अब उसी पेड़ के नीचे अपनी मां से सुनती है—जीवन कैसे चलता है, भय कैसे गायब होता है, और एक अजनबी कैसे अपनी हो जाता है।
बरगद की जटाएं अब भी धरती को छूती हैं, शाखाएं अब भी आसमान को। लेकिन उसकी सबसे महत्वपूर्ण शक्ति उसकी छाया में है—जहां हज़ारों हाथ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
🪔 सीख: परिवार और परंपरा का रिश्ता एक पेड़ की तरह होता है—जड़ें गहरी होती हैं, शाखाएं सभी को गले लगाती हैं, और उसकी छाया में हर कोई सुरक्षित महसूस करता है।
