दादी की बुनी हुई सीख

गांव के किनारे एक छोटी सी झोपड़ी में, बुजुर्ग दादी अपनी पोती लीला को चारपाई पर बैठाकर कहानी सुनाने लगीं। बाहर चांदनी रात थी, और खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी। लीला दादी की गोद में सिर रखकर उनके हाथों की दबाई हुई बुनाई को देखने लगी।

“बेटा, मैं तुम्हें एक पुरानी कहानी सुनाती हूं,” दादी ने अपनी बुनाई की सलाई को धीरे-धीरे चलाते हुए कहा। “जब मैं तुम्हारी उम्र की थी, तो हमारे गांव में एक कुम्हार रहता था। उसका नाम था धर्मेन्द्र।”

“वह कुम्हार प्रतिदिन मिट्टी से अद्भुत घड़े, दीये और मूर्तियां बनाता था। पर उसकी एक बुरी आदत थी – वह हमेशा अपने काम की प्रशंसा की चाहत रखता था। अगर कोई उसके बर्तन की तारीफ न करे, तो वह नाराज हो जाता था।”

“एक बार, गांव में एक मेला आया। धर्मेन्द्र ने अपने सबसे अंदरूनी काम की एक बहुत ही सुंदर मूर्ति बनाई। पर जब लोगों ने उसे देखा, तो किसी ने बहुत तारीफ नहीं की, क्योंकि मेले में बहुत सारी चीजें थीं।”

“धर्मेन्द्र इतना नाराज हुआ कि उसने अपनी मूर्ति तोड़ डाली। फिर वह रोते-रोते अपने घर चला गया। उसके बाद वह कुछ भी नहीं बना सका।”

“समय बीता। धर्मेन्द्र की बेटी बड़ी हुई और उसने कुम्हारी सीखी। वह बिना किसी की तारीफ की परवाह किए, हर दिन प्रेम से अपना काम करती थी। एक दिन, उसके बने एक छोटे से दीये को एक राहगीर ने खरीद लिया।”

“उस राहगीर ने उस दीये को दूर के शहर में ले गया। वहां, उस दीये को देखकर एक बड़े राजा को इतना अच्छा लगा कि उसने गांव के कुम्हार को बुलवाया। धर्मेन्द्र की बेटी ने महल के लिए अद्भुत मिट्टी के काम बनाए।”

“पर सबसे बड़ी बात यह थी कि वह कभी अपने काम पर गर्व नहीं करती थी। वह बस प्यार से काम करती थी, और यह प्यार ही उसकी सफलता की वजह बनी।”

दादी ने अपनी बुनाई रोक दी और लीला के माथे को प्यार से चूम लिया। “बेटा, याद रखना – अगर तुम अपने हर काम को प्रेम से करोगी, बिना दूसरों की तारीफ की चिंता किए, तो तुम्हारी मेहनत कभी भी व्यर्थ नहीं जाएगी। संसार स्वयं तुम्हारे पास आएगा।”

लीला की आंखें बोझिल हो गईं। वह दादी की सीख को अपने दिल में बसाते हुए, प्यार भरी दादी की बांहों में गहरी नींद सो गई। बाहर चांद मुस्कुरा रहा था, मानो वह भी दादी की पुरानी सीख को सुनकर खुश था।


🪔 सीख: असली सफलता तब आती है जब हम अपने काम को प्रेम से करते हैं, दूसरों की तारीफ की चिंता किए बिना। मन की शुद्धता और प्रामाणिकता ही जीवन का असली धन है।

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