पीपल के पेड़ का भूत

गांव के किनारे एक बहुत बड़ा पीपल का पेड़ था। कहते थे कि उसमें एक भूत रहता है जो रात को ‘खिखिखि’ की आवाज़ निकालता है। बच्चों को माता-पिता डराते थे – ‘रात को पीपल के पास मत जाना, भूत तुम्हें ले जाएगा।’ लेकिन नौ साल का राजू हमेशा उस भूत के बारे में सोचता रहता था।

एक दिन राजू को अपनी दादी की दवाई के लिए दुर्लभ जड़ी-बूटियां चाहिए थीं। गांव के वैद्य ने कहा कि वे सिर्फ पीपल के पेड़ के पास की नम ज़मीन में उगती हैं। डर के बावजूद, राजू को अपनी दादी की चिंता ने हिम्मत दी। उसने शाम को ही पीपल के पास जाने का फैसला किया।

जैसे ही सूरज डूबा, राजू घूमते हुए पीपल के पास पहुंचा। तभी उसने ‘खिखिखि’ की आवाज़ सुनी! दिल तेज़ी से धड़कने लगा। लेकिन फिर उसने देखा – एक बूढ़ी महिला पेड़ के पीछे बैठी थी, जो रो रही थी। वह कोई भूत नहीं, बल्कि गांव की पड़ोसन रामी दादी थी!

‘दादी माता, आप यहां अकेले बैठी हो?’ राजू ने पूछा। रामी दादी ने कहा, ‘बेटा, मेरा पोता दूर शहर गया है। मुझे उसकी बहुत याद आती है। मैं रोज़ रात को यहां बैठती हूं और ‘खिखिखि’ की आवाज़ निकालती हूं – ताकि गांव के लड़के मेरे पास आएं और मैं उन्हें कहानियां सुना सकूं। लेकिन सब भूत का डर खाकर भाग जाते हैं।’

राजू को सब समझ आ गया। उसने रामी दादी को अपनी दादी की बीमारी के बारे में बताया। तुरंत रामी दादी उठ गईं और जड़ी-बूटियां खोदने में उसकी मदद करने लगीं। जैसे पहचान हुई, रामी दादी ने अन्य बच्चों को भी इकट्ठा किया। अब हर शाम बच्चे पीपल के पेड़ के नीचे रामी दादी से कहानियां सुनने आते थे।

कुछ महीने बाद, जब राजू की दादी ठीक हो गई, तो वह स्वयं रामी दादी के पास जाने लगीं। और हां, ‘खिखिखि’ की आवाज़ तो अब भी आती थी – पर यह अब गांव का सबसे प्यारा संगीत बन गया था। भूत तो नहीं निकला, लेकिन एक अकेली दादी की खुशी ज़रूर निकल आई।


🪔 सीख: न सब कुछ जो डरावना दिखता है, वह बुरा होता है। जब हम डर पार करके सच जानते हैं, तो हमें अपने आस-पास की दूसरों की वास्तविक ज़रूरतें दिखाई देती हैं। सच्ची साहस सिर्फ भूत से न डरना नहीं है, बल्कि अकेले लोगों की सहायता करने का साहस है।

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