तीन पक्षी और सोने की खान

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एक समय की बात है, घने जंगल के बीच एक बरगद के पेड़ पर तीन पक्षी रहते थे — कौआ चतुर, तोता लोभी और कबूतर दयालु। वे तीनों बहुत अच्छे दोस्त थे, लेकिन उनके स्वभाव बिल्कुल अलग-अलग थे। एक दिन जब बारिश हो रही थी, एक सोने का सिक्का बहते पानी में बरगद के पेड़ के पास आ गिरा। चतुर कौए की आँख पड़ गई। उसने तुरंत दोनों दोस्तों को बुलाया और कहा, ‘देखो, यह सोना है! लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। मुझे याद है, इस जंगल में किसी जमाने में एक राजा रहता था जो यहाँ अपना खजाना छिपा गया था।’

लोभी तोते की आँखें चमक गईं। उसने चिल्लाते हुए कहा, ‘चलो, चलो! उस खजाने को खोज निकालते हैं। हम सब अमीर बन जाएँगे!’ दयालु कबूतर चिंतित हो गया। उसने कहा, ‘भाइयों, पहले हम जाँच लें। शायद यह किसी का खोया हुआ धन हो। हमें मालिक को ढूँढना चाहिए।’ लेकिन लोभी तोता और चतुर कौआ उसकी बात न सुनते हुए खजाने की खोज में निकल पड़े।

दिन-रात खोदते-खोदते वे एक पुरानी गुफा तक पहुँचे। अंदर सचमुच सोने के सिक्के भरे थे! चतुर कौए ने तुरंत सोचा कि सोना छिपा लेना चाहिए ताकि कबूतर को न पता चले। लोभी तोते ने भी एक ही मन्त्र दोहराया — ‘यह सब सिर्फ मेरा होगा, मेरा होगा!’ दोनों रात भर सोना बाँटने में लग गए। लेकिन जैसे-जैसे वे लालचीन होते गए, उनके बीच झगड़ा शुरू हो गया। कौआ कहता था कि मैंने सोना ढूँढा, तो तोता चिल्लाता था कि मैंने खोद-खोद कर निकाला। आखिरकार दोनों एक-दूसरे से लड़ते-लड़ते इतने थक गए कि एक-एक सिक्का भी नहीं उठा सके।

दयालु कबूतर उन्हें ढूँढते-ढूँढते गुफा तक पहुँचा। उसने पूरी स्थिति देखी तो समझ गया कि लालच का अंत क्या होता है। उसने थके हुए दोनों मित्रों को संभाला और कहा, ‘भाइयों, यह सोना शायद किसी गरीब के पूर्वजों का बचाया हुआ धन है। चलो, हम इसे गाँव की सेवा में लगा दें।’ पहले तो दोनों नहीं माने, पर कबूतर की निष्ठा देखकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।

तीनों ने मिलकर उस सोने से गाँव के कुआँ की मरम्मत करवाई, एक पाठशाला बनवाई और भूखों को भोजन दिया। जब उन्होंने अपने लालच को त्याग दिया, तो उन्हें सच का खजाना मिल गया — सबकी प्रशंसा, खुशियाँ और आपस में प्रेम। और तीनों दोस्त फिर से खुशहाली से रहने लगे।


🪔 सीख: लालच और स्वार्थ सबसे बड़े दुश्मन हैं। सच्ची खुशी और सम्पन्नता तभी आती है जब हम दूसरों की भलाई में अपनी चीजें लगाते हैं। ईमानदारी और त्याग ही सच्चा धन है।

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