गांव के चौपाल पर हर शाम एक अलग ही रौनक होती थी। बैलगाड़ी के पहिये की आवाज़, खेतों से लौटते किसानों की थकान भरी बातें, और बच्चों की किलकारियां — सब कुछ रुक जाता था जब रामदास आ जाते थे। रामदास, जिन्हें गांव वाले ‘दादा’ कहते थे, न तो स्कूल गए थे, न किसी किताब को पढ़ सकते थे। लेकिन उनके पास था कुछ ऐसा जो किताबों में नहीं मिलता — जीवन का असली ज्ञान और दिल की गहरी बातें।
रामदास खेतों में मेहनत करते थे पूरे दिन। धूप में, बारिश में, ठंड में — कभी शिकायत नहीं। लेकिन जब शाम का अंधकार उतरता और तारे निकलते, तो उनका मन कविता की ओर खिंचा चला जाता। गांव के लड़कों का एक झुंड उन्हें घेर लेता, और दादा अपनी सीधी-सादी, पर मर्मस्पर्शी कविताएं सुनाते।
‘आओ, सुनो एक बात,’ रामदास कहते, और सब लोग सन्नाटे में आ जाते। ‘माटी की महक ने कहा आज — जो पसीना बहाते हो तुम, वो फसल बन जाता है। फसल बनकर भी वो तुम्हारा दिल नहीं छोड़ता। हर दाने में तुम्हारी मां की दुआ है, बाप की मेहनत है।’ बस ये कुछ पंक्तियां, और पूरे गांव की आंखें भर जाती थीं।
उस गांव में एक बुजुर्ग महिला थीं, दादी सरिता। उनके पोते को शहर जाने का लालच हो गया था। वो पढ़ा-लिखा था, लेकिन अपनी जड़ों को भूल गया था। एक शाम, जब रामदास ने अपनी कविता सुनाई — ‘जो पेड़ जड़ को भूल जाए, तो हवा में उड़ का मर जाता है। पर जो जड़ को याद रखे, वो बसंत में दोबारा हरा हो जाता है’ — दादी सरिता की आंखों से आंसू बह गए। उन्होंने अपने पोते को शहर का ख़त बुलवाया और रामदास की यही कविता पढ़वाई। पोता रो पड़ा और घर लौट आया।
धीरे-धीरे रामदास का नाम गांव के बाहर भी फैलने लगा। शहर के एक स्कूल के प्रधानाचार्य को जब पता चला कि एक अनपढ़ किसान की कविताएं लड़कों का जीवन बदल रही हैं, तो वो गांव आए। उन्होंने रामदास से कहा, ‘आप को शहर के स्कूल में आमंत्रण हैं।’ लेकिन रामदास मुस्कुरा दिए। ‘बैया, कविता तो यहीं है। ये चांद, ये तारे, ये माटी, ये लोग — ये सब मेरे गुरु हैं। मैं यहीं रहूंगा।’
आज गांव में रामदास को ‘गांव का कवि’ कहा जाता है। उनकी कविताएं लिखी नहीं जातीं, बस दिलों में बसी रहती हैं। हर सांस में, हर रिश्ते में, हर मेहनत की कथा में रामदास की वो कविताएं जीवंत हैं। और शायद यही असली साक्षरता है — न कि किताब पढ़ना, बल्कि दिल को समझना और उसे बयां कर सकना।
🪔 सीख: असली शिक्षा किताबों में नहीं, बल्कि जीवन के अनुभव और दिल की भाषा में होती है। सच्चा कवि वह है जो मानवता को समझता हो, चाहे वह पढ़ा-लिखा न हो।


