गांव के सिरे पर बैठा दस साल का राज उस दिन बहुत उदास था। उसकी मां ने उसे मेले जाने के लिए पचास रुपये दिए थे, पर वह अपने दोस्त मोहन के पास नहीं था। मेले में सब खिलौने, मिठाई और रंगीन चीजें खरीद रहे थे, पर राज खाली हाथ खड़ा था। उसके पिता खेत में मेहनत करते थे, फिर भी घर में कभी खुशियां नहीं आतीं। राज सोचता था कि अगर उसके पास एक तांबे का सिक्का भी ज़्यादा होता तो कितना अच्छा होता।
उसी दिन दोपहर को उसके घर के पड़ोस में सेठ रामकिशन रहते थे। वे साल में एक बार अपनी सोने की अंगूठियां और जेवर निकालकर बगीचे में धूप में रखते थे ताकि उन्हें साफ किया जा सके। राज जब सेठ जी के बगीचे के पास से गुज़रा तो उसकी नज़र एक छोटे से लालचे की छाती पर पड़ी। उसमें सोने के सिक्के चमक रहे थे। पहरेदार दूर खेत में सो रहा था। राज का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। बस एक पल में उसने तीन सिक्के अपनी जेब में डाल दिए।
पर उस रात राज को नींद नहीं आई। उसकी मां ने पूछा कि बेटा, तू इतना चिंतित क्यों है? राज ने झूठ बोला, पर झूठ भी ठीक से बोल नहीं सका। उसके शरीर में अजीब घबराहट थी। मेले में गई खरीदारी अब उसे अच्छी नहीं लगी। हर खिलौना, हर मिठाई उसे दोषी अनुभव कराती थी। तीसरे दिन सेठ जी अपने घर पर विलाप करते नज़र आए। पूरा गांव हलचल में था। पुलिस आई, सब को डांटा-फटकारा।
राज की घबराहट पूरी हो गई। उसकी नींद उड़ गई, खाना नहीं खाया जाता था। एक दिन उसकी दादी उसे अकेले में बैठकर रो देख गईं। उन्होंने प्यार से पूछा, बेटा, क्या हुआ? फिर धीरे-धीरे राज सब कुछ कह गया। उसका दिल हल्का हो गया जैसे ही सच निकल आया।
दादी जी ने अपने सीने से लगाया और कहा, ‘सोना भी कंकड़ों जितना मायने नहीं रखता जब दिल में पाप बैठ जाए। तुम्हारी ईमानदारी ही तुम्हारी सबसे बड़ी संपत्ति है।’ उन्होंने राज को सेठ जी के पास जाने को कहा। राज के पैर कांपने लगे, पर दादी साथ गईं।
सेठ जी के घर पहुंचकर जब राज ने सच बताया और सिक्के वापस किए, तो सेठ जी की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उन्होंने कहा, ‘तुम्हारी ईमानदारी तुम्हें असली अमीर बना गई है।’ और उन्होंने राज को मेले के लिए सौ रुपये दे दिए। पर अब राज को वह सिक्के खर्च करने में कोई खुशी नहीं थी। उसे असली खुशी तो अपने दिल की सफाई में मिली थी।
🪔 सीख: चोरी से मिला माल कभी सुख नहीं दे सकता। सच्ची ईमानदारी और पछतावे के साथ किए गए सुधार ही असली खजाना हैं जो दिल को शांति देते हैं।

