गांव के किनारे बहने वाली नदी को लोग माता कहते थे। हर शाम जब सूरज पहाड़ों के पीछे छिप जाता था, तो घाट पर एक अलग ही ज़िंदगी जागती थी। बुजुर्ग महिलाएं, बच्चे, युवा—सभी मिट्टी के दीये लेकर आते थे। उस दिन भी ऐसा ही था।
नौ वर्षीय रिया अपनी दादी माता के साथ घाट पर पहुंची थी। उसकी दादी गंगा कहती थीं कि नदी की आरती हर घर में खुशियां भर देती है। लेकिन रिया को यह सब बस परंपरा लगती थी। उसे तो अपने पिता की नौकरी के लिए चिंता थी—वह तीन महीने से बेरोज़गार थे।
घाट की सीढ़ियों पर बैठते ही गंगा दादी ने रिया को दीये भरने के लिए कहा। मिट्टी के दीये, घी, रुई—सब कुछ था। दादी के हाथ कांप रहे थे, बहुत उम्र हो गई थी उनकी। रिया ने उनके हाथ को सहारा दिया।
जैसे-जैसे दीये जलाए गए, घाट की सीढ़ियां एक सुनहरी रोशनी से भर गईं। शांत नदी के पानी में दीयों का प्रतिबिंब लहरों के साथ नाच रहा था। हज़ारों रोशनियां एक-दूसरे से मिलकर ऐसा सुंदर दृश्य बना रही थीं कि रिया को होश ही नहीं रहा।
तभी गंगा दादी ने रिया के कान में धीमे से कहा, ‘बेटा, देख। हर दीया किसी न किसी की प्रार्थना ले जा रहा है नदी माता के पास। कोई अपने बीमार बेटे के लिए प्रार्थना कर रहा है, कोई अपनी बेटी की शादी के लिए, कोई किसी की नौकरी के लिए।’ दादी ने एक और दीया रिया के हाथ में पकड़ाया। ‘इसमें अपने पिता के लिए अपनी मनौती रख दे।’
रिया के आंखों में आंसू आ गए। उसने दीये को हाथ से पकड़ा और दिल ही दिल में अपने पिता के लिए प्रार्थना की। जब उसने वह दीया नदी की ओर रोल किया, तो वह अन्य हज़ारों दीयों के साथ तैरने लगा। लेकिन उसका दीया कुछ समय के लिए दूसरों से अलग चमकता रहा, जैसे कोई उसे स्वीकार कर रहा हो।
अगले सप्ताह रिया के पिता को एक बड़ी कंपनी में नौकरी की ऑफर मिल गई। परिवार खुशियों से भर गया। लेकिन रिया को जो सबक मिला वह उससे भी बड़ा था। उसे समझ आ गया कि आस्था सिर्फ देवताओं में नहीं, बल्कि आपस के जुड़ाव में होती है। नदी के घाट पर जब हज़ारों दिल एक साथ प्रार्थना करते हैं, तो एक ऐसी शक्ति बनती है जो स्वर्ग तक पहुंचती है।
तब से हर शाम, रिया अपनी दादी के साथ घाट पर जाती है। और जब वह दीयों की रोशनी देखती है, तो उसे याद आता है—माता उन सभी को सुन रही है जो सच्चे मन से आते हैं।
🪔 सीख: असली श्रद्धा और प्रेम की शक्ति अकेले नहीं, बल्कि समुदाय के एक साथ जुड़ाव में निहित होती है। प्रकृति और परमात्मा हमेशा उन्हीं को सुनते हैं जो सच्चे मन से आते हैं।

