एक समय की बात है, पुरानी पहाड़ियों के पास एक घने जंगल में तीन मित्र रहते थे – बुद्धिमान उल्लू शर्मा, ईमानदार खरगोश रमेश और चतुर लोमड़ी मीरा। तीनों एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे और हमेशा एक साथ रहते थे।
एक दिन, जब वे नदी के किनारे भोजन खोज रहे थे, तो खरगोश रमेश को जमीन में एक पुराना सोने का बर्तन मिला। यह बर्तन इतना चमकदार था कि सूरज की रोशनी में सोने जैसा दिखाई दे रहा था। तीनों ने मिलकर इसे खोदा और बाहर निकाला।
उल्लू शर्मा बोला, ‘यह बर्तन हमारा साझा खजाना है। हम इसे बराबर-बराबर बाँट लेंगे।’ लोमड़ी मीरा ने कहा, ‘नहीं, मैंने इसे देखा था। यह मेरा है।’ खरगोश रमेश चुप रहा और अपने मन में सोचने लगा।
लड़ाई बढ़ने लगी। उल्लू ने कहा कि बर्तन तीनों का है क्योंकि तीनों ने मिलकर इसे निकाला। लोमड़ी ने कहा कि वह सबसे चतुर है, इसलिए यह उसका है। खरगोश रमेश ने शांति से कहा, ‘मित्रों, आइए गांव जाएं और पंडित से पूछें कि यह बर्तन किसका है।’
तीनों गांव गए। पंडित ने बर्तन को देखा और कहा, ‘यह बर्तन तो सौ साल पुराना है। इसका असली मालिक तो शायद अब दुनिया में नहीं रहा। लेकिन मेरी सलाह है – जो मित्र सबसे ईमानदार है, उसे यह बर्तन दे दो।’
यह सुनते ही उल्लू और लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ। दोनों ने खरगोश रमेश को देखा, जो शांत और सीधा खड़ा था। पंडित ने कहा, ‘इस खरगोश ने कभी झूठ नहीं बोला और लड़ाई नहीं की। यह सच्चा मित्र है।’
खरगोश रमेश ने बर्तन लिया और तुरंत कहा, ‘यह बर्तन तो मेरा नहीं है, यह तीनों का है। मैं इसे गांव के मंदिर को दान कर दूंगा, ताकि हर कोई इसका लाभ उठा सके।’ यह सुनकर उल्लू और लोमड़ी के आंसू बहने लगे। उन्होंने अपने मित्र को गले लगाया।
उस दिन के बाद, तीनों मित्र हमेशा एक-दूसरे की सलाह सुनते थे और कभी किसी चीज़ के लिए लड़ाई नहीं करते थे। उनका मित्रता और ईमानदारी पूरे जंगल में प्रसिद्ध हो गई। और गांव के लोग भी हमेशा बताते थे कि सच्चा मित्र और ईमानदारी सोने से भी ज्यादा कीमती होती है।
🪔 सीख: लालच और झूठ से दोस्ती टूटती है, जबकि ईमानदारी और सच्चाई रिश्तों को मजबूत बनाती है। सोना और दौलत अस्थायी हैं, पर सच्चे मित्र और आपकी सीधी सादगी हमेशा आपके साथ रहती है।



