राखी का वादा
गांव के छोर पर बने पुरानी अटारी वाली हवेली में नौ साल की प्रिया दर्पण के सामने राखी को बार-बार निहार रही थी। सोने और रुद्राक्ष के मनके पिरोई गई वह राखी उसके दादा-दादी द्वारा सिर्फ इसी बहू के लिए बनवाई गई थी। पर प्रिया की सारी खुशियां एक ही बात पर टिकी थीं—उसके भाई कुणाल का लौटना।
पिछले महीने से कुणाल शहर में अपने मामा के साथ पढ़ाई के लिए रह रहा था। प्रिया और कुणाल की नोक-झोंक तो रोज़मर्रा की बात थी। कुणाल उसकी किताबें छिपा देता, वह बदले में उसके पतंग को आग लगा देती। माता-पिता को शिकायते दोनों को ही मिलती थीं, पर यह सब मज़ाक के बीच होता था। अब उसी नोक-झोंक के लिए प्रिया को कितनी बेचैनी हो रही थी।
राखी की सुबह जब प्रिया उठी, तो उसका दिल टूट गया। चिठ्ठी मिली—कुणाल की मामा बीमार पड़ गई थीं। कुणाल नहीं लौट सकता। माँ ने प्रिया को समझाया, पर वह सब समझ नहीं पाई। उसकी राखी किसके हाथ पर बंधेगी?
दोपहर में गांव की महिलाओं के साथ प्रिया के माता-पिता पंडित के घर गए। भीड़ में बैठती हुई प्रिया सब कुछ भूल गई। तभी पंचायत के चौकीदार ने घोड़े पर सवार होकर गांव में प्रवेश किया। पीछे एक अन्य घुड़सवार था। प्रिया की नज़र उस पर पड़ी और वह चिल्ला उठी—’कुणाल!’
कुणाल धूल उड़ाता हुआ दौड़ता आया। उसके कपड़े गंदे थे, चेहरा पसीने से सना हुआ था, पर उसकी मुस्कान में खुशियां थीं। वह कहने लगा, ‘मामा को चाची देख लेंगी, मैं अपनी बहन का राखी नहीं छोड़ सकता।’ प्रिया के आंसू झर आए। उसने झपटकर भाई को गले लगा लिया।
आंगन में, सूर्यास्त की सुनहरी रोशनी में, पीपल के पेड़ की छाया में बैठकर, प्रिया ने अपने भाई की आरती उतारी। उसके हाथ कांप रहे थे। जब वह राखी बांधने लगी, तो कुणाल ने उससे पूछा, ‘अब तुम्हारा क्या वादा है?’
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘कि तुम हमेशा मेरी बात सुनोगे। और मैं तुम्हारे सपनों में कभी बाधा नहीं बनूंगी।’ कुणाल ने अपनी बहन के सिर पर हाथ रखा और कहा, ‘और मैं तुम्हारे साथ-साथ हर कदम चलूंगा। चाहे कितना भी दूर क्यों न रहूं, राखी का यह रिश्ता कभी टूटेगा नहीं।’
उस रात, जब सितारे खिल गए, तब भी दोनों आंगन में बैठे थे। कुणाल अपनी बहन के लिए खेतों वाली कहानी सुना रहा था, और प्रिया उसके कंधे पर सर रखे मुस्कुरा रही थी। उनकी नोक-झोंक तो वापस आएगी, पर अब उसमें एक नया आयाम था—प्यार और वादे का।
🪔 सीख: राखी का पर्व सिर्फ राखी बांधना नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच के प्यार, विश्वास और हमेशा साथ रहने के वादों का प्रतीक है। दूरी कभी इस रिश्ते को कमजोर नहीं कर सकती जब दिल में सच्चा प्रेम हो।

