नदी की बेटी
दस साल की मेहरा को सबसे प्यारी जगह नदी के किनारे की वह पुरानी बरगद की जड़ें थीं। दादी कहतीं, ‘बेटा, नदी सिर्फ पानी नहीं देती, वह हमें सिखाती है कि जीवन कैसे बहना चाहिए – बिना रुके, बिना शिकायत किए।’

दस साल की मेहरा को सबसे प्यारी जगह नदी के किनारे की वह पुरानी बरगद की जड़ें थीं। दादी कहतीं, ‘बेटा, नदी सिर्फ पानी नहीं देती, वह हमें सिखाती है कि जीवन कैसे बहना चाहिए – बिना रुके, बिना शिकायत किए।’