मज़दूर की दिवाली
राधा की झोपड़ी में दिवाली आई, पर न घी की मिठाई, न कीमती दीये। फिर भी उसके हाथों से बनी शक्कर और मिट्टी के दीये पूरे परिवार की आँखों में खुशी की रोशनी ले आए।

राधा की झोपड़ी में दिवाली आई, पर न घी की मिठाई, न कीमती दीये। फिर भी उसके हाथों से बनी शक्कर और मिट्टी के दीये पूरे परिवार की आँखों में खुशी की रोशनी ले आए।