दोस्ती की कसम
बस्ती के पुराने बरगद के नीचे राज और मोहन की दोस्ती अलग हो गई, पर कसम नहीं। बीस साल बाद, उसी जगह पर, उन्होंने फिर से एक-दूसरे को पाया।

बस्ती के पुराने बरगद के नीचे राज और मोहन की दोस्ती अलग हो गई, पर कसम नहीं। बीस साल बाद, उसी जगह पर, उन्होंने फिर से एक-दूसरे को पाया।