बसंत का मेला और बुजुर्ग दादी का सपना
बारह साल की गुड़िया ने अपनी बुजुर्ग दादी के बीस साल पुराने सपने को बसंत के मेले में पूरा करने का बीड़ा उठाया, और सीखा कि असली उपहार ढूंढते नहीं, देते हैं।

बारह साल की गुड़िया ने अपनी बुजुर्ग दादी के बीस साल पुराने सपने को बसंत के मेले में पूरा करने का बीड़ा उठाया, और सीखा कि असली उपहार ढूंढते नहीं, देते हैं।

एक छोटी बालिका मीरा अपनी दादी के साथ बसंत के मेले में जाती है। पीली चुनरियों और सरसों के फूलों के बीच, वह अपनी दादी को नया जीवन देखने का आनंद देती है और समझ जाती है कि प्रेम ही सबसे बड़ा त्योहार है।