दादी की टुटी हुई कंगन
शीतल रात थी। गांव के पुरानी हवेली में छत पर एक छोटी सी बालिका अपनी दादी के पास बैठी थी। दादी की सफेद साड़ी चांदनी में चमक रही थी। पोती नीशा ने पूछा, “दादी, आपकी कलाई पर यह टूटी हुई कंगन क्यों है? इसे उतार क्यों नहीं देतीं?”
दादी मुस्कुराईं और नीशा को अपनी गोद में बिठाया। “बेटा, यह कंगन मेरी सबसे कीमती चीज़ है। इसके पीछे एक कहानी है।” दादी की आंखें दूर देख गईं, मानो वह अतीत में लौट गईं।
“तुम्हारे दादा जी और मैं विवाह के बाद इसी गांव आए थे। वह समय बहुत कठिन था। हमारे पास बस एक छोटा सा घर था और दो हाथ। तुम्हारे दादा जी खेतों में काम करते थे। एक बार गांव में भीषण सूखा पड़ा। सब कुछ सूख गया – खेत, तालाब, कुएं। गांव के सभी लोग भूखे रहने लगे।”
नीशा घबरा गई। “फिर आप सब ने क्या किया, दादी?”
“तुम्हारे दादा जी ने सभी को इकट्ठा किया। हम सब ने तीस किलोमीटर दूर दूसरे गांव से पानी लाने का फैसला किया। हर दिन हम जाते, पानी भरते और वापस आते। एक दिन, गर्मी और थकान में मेरी यह कंगन टूट गई और खेत में गिर गई।”
दादी ने अपनी टूटी कंगन को प्यार से देखा। “मैंने उसे लौटाने के लिए जाने की कोशिश की, पर तुम्हारे दादा जी ने रोका। उन्होंने कहा, ‘इसे टूटा ही रहने दो। यह हमारी मेहनत और एकता का प्रतीक है। एक पूरी कंगन से बेहतर है एक टूटी हुई कंगन जो हमें याद दिलाए कि संकट में हम कभी हार नहीं मानते।'”
नीशा ने पूछा, “क्या सूखा खत्म हुआ?”
“हां, बेटा। हमारी मेहनत से बारिश हुई। गांव बच गया। उस दिन से मैंने इस कंगन को कभी उतारा नहीं। हर बार जब मैं इसे देखती हूँ, मुझे याद आता है कि जीवन में असली खूबसूरती टूटे हुए पलों को एक साथ जोड़ने में है। खराबियों को स्वीकार करने में है।”
दादी ने नीशा के माथे पर चुम्बन किया। “बेटा, यह दुनिया तुम्हें हमेशा पूरी और तैयार नहीं रखेगी। कभी-कभी तुम टूटोगी। पर याद रखना – हर दरार से ही सोने की रोशनी निकलती है।”
नीशा सो गई, दादी की कहानी उसके दिल में बस गई। वह टूटी हुई कंगन चांदनी में चमक रही थी, जैसे पूरी कहानी खुद ही बता रही हो।
🪔 सीख: जीवन के टूटे हुए पलों में ही असली मजबूती और सीख छिपी होती है। कठिनाइयों को स्वीकार करना और उनसे आगे बढ़ना ही असली सुंदरता है।
