सरसों के पीले सपने
गांव खिरबा की सरसों के खेतों में हर साल वही जादू होता था। पीली फसल लहराती थी तो मन में एक अलग ही खुशी आती थी। इसी खेत में नौ साल का राज और सात साल का छोटू भाई हर दिन दौड़ते थे, खेल खेलते थे।
राज का बाप खेत का मालिक था और छोटू का बाप उसी खेत में काम करता था। दोनों लड़के खून के भाई न हों, पर सरसों के पीले सागर में उनकी दोस्ती कुछ और ही थी। राज के घर में सब कुछ था, पर उसे सबसे ज्यादा प्यारा छोटू था। छोटू के पास खिलौने नहीं थे, पर उसकी हंसी राज के दिल को भर देती थी।
सरसों की कटाई का मौसम आया। गांव भर में खुशियां थीं। राज की मां ने उसे नए कपड़े बनवाए थे—सफेद कुर्ता और नीली धोती। छोटू के पास बस एक पुरानी बनियान थी। जब छोटू ने इसे देखा तो सिर्फ मुस्कुरा दिया, कोई शिकायत नहीं की।
एक दिन सुबह-सुबह राज छोटू को लेकर सरसों के खेत में गया। सूरज अभी-अभी निकला था और सुनहरी धूप पीली फसल पर पड़ रही थी। खेत पूरा सोना-सोना लग रहा था। हवा चल रही थी तो सरसों की खुशबू आती थी। दूर तक सिर्फ पीले फूलों की लहरें थीं।
राज ने छोटू को अपने कंधे पर बैठा लिया। छोटू अपनी खुशी से चिल्ला रहा था—’भैया, भैया, आसमान छूंगा!’ राज दौड़ता था, गाता था, घूमता था। सरसों की पंक्तियों के बीच से गुजरते हुए दोनों हंसते थे।
अचानक राज को एक पक्षी का घोंसला दिखा। उसमें दो छोटी चिड़ियां थीं। छोटू की आंखें चमक गईं। राज ने उसे पास ले जाया, पर उसने कहा, ‘भैया, उन्हें दुखी न करो। उनकी मां को खोजने दो।’ राज को अपने छोटे भाई की सोच पर हैरानी हुई।
शाम को जब दोनों घर लौटे तो राज की मां ने छोटू को नए कुर्ते देने चाहे। पर छोटू का बाप आया और कहा, ‘बहु जी, ये ठीक नहीं है।’ राज तुरंत बोल पड़ा, ‘चाचा, वह मेरा भाई है। मेरे भाई को तो सब कुछ चाहिए।’ उसने अपने नए कपड़े छोटू को दे दिए।
उस दिन के बाद, पूरा गांव समझ गया कि पीली सरसों के खेतों में सबसे खूबसूरत चीज दो भाइयों की दोस्ती थी। राज और छोटू हर साल सरसों के मौसम का इंतजार करते थे, न कि खेत के लिए, बल्कि एक दूसरे को पास पाने के लिए।
🪔 सीख: सच्ची दोस्ती और भाईचारे का कोई रंग-रूप नहीं होता। अमीरी-गरीबी से ऊपर उठकर जो प्यार है, वही सबसे बड़ा खजाना है। छोटी चीजों में दूसरों की खुशी देखना ही असली सुख है।


