तीन चिड़ियों की बुद्धिमानी
एक समय की बात है, एक घने बांस के जंगल में तीन चिड़ियों का परिवार रहता था। बड़ी चिड़िया का नाम था मुन्नी, मझली का नाम सीमा और सबसे छोटी का नाम गिधिया था। तीनों एक ही घोंसले में साथ रहती थीं, लेकिन उनके विचार बिल्कुल अलग थे।
एक दिन तीनों ने बांस की शाखाओं पर कुछ चमकीले दाने देखे। सीमा ने उन्हें खाने के लिए तुरंत झपट्टा मारा, लेकिन मुन्नी ने कहा, ‘रुको! पहले सोच-समझ लो। ये दाने इतने सुंदर और अजीब हैं कि शायद किसी शिकारी का फंदा हो।’ गिधिया भी मुन्नी की बात से सहमत थी, लेकिन सीमा ने हँसते हुए कहा, ‘तुम दोनों बहुत डरपोक हो। भूख और सोच-विचार साथ नहीं चल सकते।’ यह कह कर वह उन दानों को खाने के लिए झुकी, पर तभी एक जाल उस पर गिर गया। सीमा चिल्लाते हुए घोंसले में वापस आई।
अगले दिन एक शिकारी का पड़ोसी गांव में एक सुंदर बीज बिखेरता हुआ निकला। मुन्नी ने दूर से ही समझ गया कि यह भी एक फंदा है। सीमा को अब विश्वास हो गया था, पर गिधिया कहने लगी, ‘लेकिन ये बीज सच में खाने लायक हैं। क्या हम सारी उम्र भूखे रहेंगे?’ मुन्नी ने समझाया, ‘न बेटा, हम सोच-समझकर काम लेंगे। देख, बांस के दूसरी ओर के जंगल में फल और कीड़े भरे हैं। वहाँ कोई शिकारी नहीं है। वहाँ हम सुरक्षित रहेंगे।’
तीनों मिलकर उस नए इलाके में गईं। वहाँ उन्हें बहुत सारे स्वादिष्ट फल, कीड़े और दाने मिले। उन्होंने एक नया घोंसला बनाया। एक दिन एक बुजुर्ग उल्लू उधर निकला। मुन्नी ने उसे सारा किस्सा सुनाया। उल्लू ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बेटा, तुमने सबसे बड़ी बुद्धिमानी दिखाई है – वह यह कि तुमने अपनी गलती से सीखा और दूसरों को भी सिखाया। जो पक्षी आलस्य से भूखा मरता है, वह समझदार नहीं; पर जो सतर्कता से जीता है, वही सच्चा बुद्धिमान है।’
उसके बाद तीनों चिड़ियों की ख्याति पूरे जंगल में फैल गई। हर पक्षी उनसे सीखना चाहता था कि कैसे सावधानी और विवेक के साथ जीवन जिया जाए। मुन्नी, सीमा और गिधिया खुशी से अपने घोंसले में रहने लगीं, और हमेशा याद रहता था – ‘आलस और अंधी भूख की वजह विवेक और सतर्कता ही सच्ची संपत्ति है।’
🪔 सीख: सतर्कता और विवेक ही जीवन की सबसे बड़ी सम्पत्ति हैं। आलस और तत्काल इच्छाएं हमें गलत रास्ते पर ले जाती हैं। जो सोच-समझकर निर्णय लेते हैं और अपनी गलतियों से सीखते हैं, वही सच्चे बुद्धिमान होते हैं।
