हरिपुर गांव के किनारे, पीपल के घने पेड़ों के बीच एक पुराना कुआं खड़ा था। उसकी ईंटें काली पड़ गई थीं, किनारे पर काई जम गई थी, और गांववासी उसे ‘भूतिया कुआं’ कहते थे। माना जाता था कि रात को उससे अजीब आवाजें आती थीं—किसी औरत का रोना, किसी बच्चे की हंसी, और कभी-कभी घंटियों की झनकार।
नौ साल का राजू इन्हीं डरावनी बातों को सुन-सुनकर बड़ा हुआ था। उसकी दादी अक्सर कहतीं कि सौ साल पहले इसी कुएं में एक ग़रीब लड़की गिरी थी जिसे कोई बचा नहीं सका। तब से उसकी आत्मा यहां भटकती है। गांव के लोग नियम से दूसरे कुएं से पानी भरते थे।
एक गर्मी की दोपहर, जब सूरज सिर पर तपता था, राजू अपने दोस्त मोहन के साथ उस रहस्यमयी कुएं के पास पहुंचा। दोनों बैठे हुए थे—राजू पीपल की जड़ों पर बैठा, मोहन कुएं की दीवार पर। तभी राजू को कुएं की गहराई से एक धीमी आवाज सुनाई दी। वह एक गीत था—बहुत पुरानी, बहुत मधुर आवाज में कोई लोरी गा रहा था।
राजू का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वह धीरे-धीरे कुएं के मुंह तक रेंगा। नीचे, पानी की सतह पर, चांदनी के समान एक हल्का प्रकाश दिख रहा था। और उस प्रकाश में, एक महिला की आकृति नज़र आई—लंबी साड़ी पहने, लंबे बाल, और चेहरे पर करुणामयी मुस्कुराहट।
‘बेटा,’ वह बोली, ‘मैं यहां अकेली नहीं हूं। मेरे साथ सौ साल की यादें हैं। मैं किसी को चोट पहुंचाना नहीं चाहती। मैं तो बस अपनी कहानी कहना चाहती हूं।’
राजू को अचानक समझ आ गया। यह भूत नहीं, एक माँ की आत्मा थी जो अपने दुःख को साझा करना चाहती थी। उसने पूरी रात कुएं के पास बैठकर उस महिला की कहानी सुनी। उसने बताया कि वह कभी एक धनवान ज़मींदार की दासी थी, और दुर्घटनावश कुएं में गिर गई थी। पर वह भटकती नहीं थी—वह तो गांव की देखभाल कर रही थी, सूखे से बचा रही थी, बीमारों को ठीक कर रही थी।
सुबह, जब राजू गांव लौटा, तो उसने सब कुछ बताया। पहले गांववासी सशंकित थे, पर फिर उन्होंने महसूस किया कि पिछले सौ सालों में उस कुएं के चारों ओर कभी कोई बीमारी नहीं आई, फसलें हमेशा अच्छी हुई थीं। कुआं शाप नहीं, एक आशीर्वाद था।
अब गांव के लोग हर पूर्णिमा को उस कुएं के पास फूल और दिये रखते हैं। राजू बड़ा हुआ, और वह हर साल उस कहानी को नई पीढ़ी को सुनाता है। और कुआं? वह अब भी वहां है, शांत, रहस्यमयी, पर अब कोई उसे नहीं डरता। क्योंकि जब आप किसी दुःख को सुनते हो, उसे समझते हो, तो वह डर में नहीं रह जाता—वह सिर्फ एक सुंदर, उदास कहानी बन जाती है।
🪔 सीख: जो हमें भयानक दिखता है, वह अक्सर अकेलेपन और दुःख से भरी किसी आत्मा की पुकार होती है। सहानुभूति और सुनने की क्षमता से रहस्य सुलझते हैं और डर तक़ल्लुफ़ में बदल जाता है। हर कहानी के पीछे एक इंसानी दिल होता है।

