बिरजी गांव का सबसे गरीब परिवार था। राज नाम का दस साल का लड़का उसी परिवार में रहता था। उसका बाप दिहाड़ी मजदूरी करता था और माँ दूसरों के घरों में झाड़ू पोछा करती थीं। घर में मिट्टी के बर्तन, फटे कपड़े और खाने का भी कभी-कभी अभाव रहता था। लेकिन राज की खुशियां इतनी सस्ती थीं कि एक कंचे से भी पूरा दिन खेल लेता था।
हर साल वैशाख महीने में बिरजी गांव में बड़ा मेला लगता था। रंगीन झूले, तरह-तरह की मिठाइयां, मिट्टी की खिलौनों की दुकानें और तमाम चमकदार सामान। राज भी साल भर इसी मेले का इंतज़ार करता रहता था। लेकिन जेब में पैसे न होने से हमेशा दूर से ही मेले को देखा करता था।
इस बार राज को एक सपना आया। वह मेले में एक चाकू खरीदेगा। एक असली चाकू जो अन्य लड़कों के पास भी नहीं है। उसके साथ वह छड़ी काट सकेगा, लकड़ी तराश सकेगा और गांव के सब लड़कों की सबसे बड़ी चीज़ हो जाएगा। महीने भर से वह खेतों में अपने बाप के साथ काम करता, रेत खोदता, पत्थर बीनता और हर पैसा बचाता। खाने के लिए मांगे हुए एक अतिरिक्त रोटी को देखकर भी चुप रहता ताकि कुछ खरीद सके।
मेले का दिन आया। सूरज निकलते ही पूरा गांव खुशियों से भर गया। राज के पास बारह आने थे – एक चाकू के लिए काफी। बाज़ार में पहुंचते ही उसके पैर अपने आप लोहार की दुकान की ओर बढ़ गए। वहां एक पुराना लेकिन बिल्कुल नया जैसा चाकू पड़ा था। कीमत – बारह आने। राज की सांस रुक गई। यह तो उसका ही चाकू था।
चाकू खरीदते ही राज का मुंह खिल गया। वह सारे मेले में घूमता रहा, अपना चाकू दिखाते हुए। लेकिन तभी उसकी नज़र एक छोटे बच्चे पर पड़ी। वह बच्चा, राज से भी छोटा, एक लड़की थी। उसके पास कुछ नहीं था। वह बस मेले में खड़ी थी, सब कुछ देख रही थी लेकिन कुछ खरीद नहीं सकती थी। उसकी आँखों में उसी तरह का सपना था जो राज की आँखों में कुछ घंटे पहले था।
राज की छाती में कुछ हिला। उसने अपने हाथ से अभी-अभी खरीदा हुआ नया चाकू निकाला और उस लड़की को दे दिया। लड़की की आँखें आश्चर्य और खुशी से भर गईं। उसने चाकू को इतने प्यार से पकड़ा जैसे वह कोई सोने की चीज़ हो।
उस पल राज को अपने चाकू की ज़रूरत महसूस नहीं हुई। उसे महसूस हुआ कि जो खुशी उस लड़की की आँखों में आई है, वह किसी चाकू से बहुत ज़्यादा बड़ी है। मेले से लौटते समय राज के हाथ में कुछ नहीं था, लेकिन उसका दिल जो खुशियों से भरा था, वह उसके पूरे जीवन के लिए काफी था।
🪔 सीख: असली खुशी दूसरों को खुश देखने में है। अपने सपने को त्यागकर किसी और का सपना पूरा करना ही सबसे बड़ी सीख है।

