गांव का रहस्यमयी कुआं

बहुत पहले एक छोटे से गांव में एक पुराना कुआं था। उसकी ईंटें काली पड़ गई थीं, किनारे टूटे हुए थे, और उसके पास कोई नहीं जाता था। गांव के बुजुर्ग कहते थे कि इस कुएं में एक परी रहती है जो रात भर गीत गाती है। लड़कों को तो वह परी कभी नहीं दिखी, पर रात की ख़ामोशी में उन्हें एक सुरीली आवाज़ सुनाई देती थी।

गांव के एक किनारे पर रहने वाली एक लड़की थी, नाम था लतिका। उसकी माँ बीमार थी और घर में पैसे नहीं थे। एक दिन लतिका की दादी ने उसे बुलाया और कहा, ‘बेटा, अगर तुम उस कुएं के पास जाकर रात भर वहां रहो और परी से पूछो कि वह हर रात क्यों गाती है, तो शायद तुम्हें खज़ाने का पता चल जाए।’ लतिका को शक था पर माँ की बीमारी के कारण वह तैयार हो गई।

उस रात लतिका एक दीये के साथ कुएं के पास पहुंची। चाँद बादलों में छिपा था और हवा ठंडी थी। जैसे ही आधी रात हुई, उसे वही सुरीली आवाज़ सुनाई दी, पर यह गीत नहीं था। यह एक दर्दभरी सिसकी थी। लतिका ने साहस करके कुएं में झाँका। उसे एक बूढ़ी महिला नज़र आई जो पत्थर की सीढ़ियों पर बैठी थी। उसके हाथ में एक टूटा हुआ सोने का कंगन था।

‘तुम कौन हो?’ लतिका ने पूछा। बूढ़ी महिला ने अपनी ख़ून भरी आँखें उठाईं। ‘मैं इसी गांव की हूँ,’ उसने कहा, ‘पचास साल पहले मेरा सोना इस कुएं में गिर गया था। मेरे पति ने मुझे मार दिया और मैं यहीं प्राण त्याग गई। तब से मैं यहीं फंसी हूँ, हर रात अपना दर्द गाती हूँ।’

लतिका की आँखों में आँसू आ गए। उसने पूछा, ‘मैं आपकी मदद कर सकती हूँ?’ बूढ़ी ने सोने का कंगन दिखाया और कहा, ‘इस कंगन को निकाल और इसे उस चमेली के पेड़ के नीचे दफ़न कर दे जो कुएं के बाहर है। यह मेरी पहचान है। जब कोई इसे दफ़नाएगा तो मेरी आत्मा को शांति मिलेगी।’

लतिका ने कुएं में उतरने की हिम्मत की। पानी बहुत ठंडा था, पर उसके दिल में साहस था। उसने कंगन निकाला और कुएं से बाहर आ गई। तभी उसे कुएं के नीचे एक मिट्टी का घड़ा दिखाई दिया। जब उसने उसे खोला, तो उसमें सोने के सिक्के भरे थे। लतिका समझ गई कि बूढ़ी महिला ने उसे सच कहा था।

लतिका ने कंगन को चमेली के पेड़ के नीचे दफ़न किया। सुबह जब सूरज निकला, तो कुएं से एक सफ़ेद उजाला निकला। लतिका को लगा कि बूढ़ी की आत्मा अब शांत हो गई है। उसने सोने के सिक्कों से अपनी माँ का इलाज करवाया और गांव के लोगों को कुएं की सच्ची कहानी बताई।

उस दिन के बाद कुएं से कभी कोई सिसकी नहीं सुनाई दी। लतिका हर महीने चमेली के पेड़ के नीचे फूल रखती थी। गांव के बुजुर्ग कहने लगे कि यह कुआं अब खुशियों का कुआं है, क्योंकि किसी ने एक दर्दभरी आत्मा को शांति दे दी थी।


🪔 सीख: दूसरों का दर्द समझना और उनकी मदद करना ही असली धन है। साहस और दया से हर रहस्य सुलझ जाता है।

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